*जब भारत सहिष्णुता का राष्ट्र है, तो वक़्फ जैसी संस्थाओं की आवश्यकता क्या है?* भारत दुनिया का सबसे सहिष्णु, सबसे उदार और सबसे धार्मिक-सांस्कृतिक सद्भाव वाला राष्ट्र माना जाता है। लेकिन विडंबना यह है कि इसी सहिष्णु देश में कुछ संस्थाएँ ऐसी हैं जिन्हें विशेष शक्तियाँ, विशेष अधिकार और विशेष दर्जा देकर बाकी नागरिकों से ऊपर बैठा दिया गया है। सबसे बड़ा उदाहरण वक़्फ बोर्ड। वक़्फ बोर्ड: एक “सुपर पावर” जो संविधान से भी ऊपर?देश में कोई भी सरकारी विभाग, पुलिस, कलेक्टर, कोर्ट किसी संपत्ति को अपने नाम नहीं कर सकता बिना लंबी प्रक्रियाओं, जांचों और अनुमति के। लेकिन वक़्फ बोर्ड को सिर्फ “घोषणा” करना होती है कि फला जमीन वक़्फ की है और वह जमीन उनके नाम दर्ज हो जाती है।कोई जांच नहीं, कोई सुनवाई नहीं, कोई सीमांकन नहीं।कौन सा लोकतांत्रिक देश एक ही धर्म को यह “अलौकिक अधिकार” दे सकता है? भारत जैसा उदार राष्ट्र भी ऐसी संस्थाओं को अनुमति देता रहा यह सवाल खड़ा करता है। सहिष्णुता सबके लिए है, विशेषाधिकार किसी के लिए नहीं यदि भारत वाकई सहिष्णु राष्ट्र है तो सहिष्णुता बहुमत अल्पसंख्यक पर आधारित नहीं हो सकती।स...
नमस्कार, मैं कीर्ति कापसे, पेशे से पत्रकार और मीडिया स्पेशलिस्ट, लगभग दो दशकों तक देश के प्रतिष्ठित अखबार दैनिक भास्कर , दैनिक नईदुनिया, और डिजिटल मीडिया मीडियावाला.कॉम में बतौर वरिष्ठ पत्रकार और नेशनल GRC हेड के तौर पर अपनी सेवाएं दी है। "शब्द बहुत शक्तिशाली है जो हमारे भीतर छिपी कहानियों को बाहर ले आते है।"