जलवायु परिवर्तन आज की सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक समस्याओं में से एक है। भारत में इसका प्रभाव प्राचीन काल से ही देखा जा सकता है। इतिहास और पुरातत्व के प्रमाणों के साथ-साथ साहित्यिक और सांस्कृतिक स्रोत भी यह संकेत देते हैं कि भारत ने जलवायु परिवर्तन के कई चरणों का अनुभव किया है। इसका प्रभाव न केवल पर्यावरण पर, बल्कि समाज, अर्थव्यवस्था और संस्कृति पर भी पड़ा। जलवायु परिवर्तन के ऐतिहासिक प्रमाण 1. सिंधु घाटी सभ्यता (2500-1700 ईसा पूर्व) सिंधु घाटी सभ्यता के पतन का एक मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन माना जाता है। कई पुरातत्व और भूगर्भीय अध्ययन यह संकेत देते हैं कि इस क्षेत्र में सरस्वती नदी के सूखने और वर्षा की मात्रा में भारी कमी के कारण कृषि आधारित यह सभ्यता नष्ट हो गई। नदी के सूखने से न केवल जल स्रोत समाप्त हुए, बल्कि भूमि का उपजाऊपन भी घट गया। 2. वैदिक काल और नदियों का प्रवाह वैदिक ग्रंथों में सरस्वती और अन्य नदियों का उल्लेख मिलता है। जलवायु परिवर्तन के कारण सरस्वती नदी सूख गई, और इसके परिणामस्वरूप आर्यों को गंगा और यमुना नदी की ओर पलायन करना पड़ा। यह न केवल भौगोलिक बदलाव था, बल्कि धार्मिक और ...
नमस्कार, मैं कीर्ति कापसे, पेशे से पत्रकार और मीडिया स्पेशलिस्ट, लगभग दो दशकों तक देश के प्रतिष्ठित अखबार दैनिक भास्कर , दैनिक नईदुनिया, और डिजिटल मीडिया मीडियावाला.कॉम में बतौर वरिष्ठ पत्रकार और नेशनल GRC हेड के तौर पर अपनी सेवाएं दी है। "शब्द बहुत शक्तिशाली है जो हमारे भीतर छिपी कहानियों को बाहर ले आते है।"