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SWIFT प्रणाली का अमेरिका और यूरोपीय संघ द्वारा दुरुपयोग

 SWIFT (Society for Worldwide Interbank Financial Telecommunication) एक वैश्विक बैंकिंग संदेश प्रणाली है, जिसका उपयोग बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बीच लेन-देन की सूचना भेजने के लिए किया जाता है। हालांकि, यह एक गैर-सरकारी संगठन है, लेकिन अमेरिका और यूरोपीय संघ का इस पर प्रभाव काफी मजबूत है। कई मौकों पर इस प्रणाली का राजनीतिक हथियार के रूप में उपयोग किया गया है।

1. ईरान पर SWIFT प्रतिबंध (2012, 2018)

  • 2012 में, अमेरिका और यूरोपीय संघ ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए SWIFT से ईरानी बैंकों को हटा दिया, जिससे ईरान का वैश्विक व्यापार ठप हो गया।
  • 2015 में, जब ईरान ने परमाणु समझौता (JCPOA) किया, तो उसे SWIFT में फिर से जोड़ा गया।
  • 2018 में, अमेरिका ने JCPOA से खुद को अलग कर लिया और फिर से ईरानी बैंकों को SWIFT से प्रतिबंधित कर दिया। इससे ईरान के लिए तेल का निर्यात करना और अन्य देशों के साथ व्यापार करना बेहद मुश्किल हो गया।

2. रूस पर SWIFT प्रतिबंध (2022)

  • यूक्रेन युद्ध (फरवरी 2022) के बाद अमेरिका और यूरोपीय संघ ने रूस के कई बड़े बैंकों को SWIFT से हटा दिया, जिससे रूस के लिए अंतरराष्ट्रीय भुगतान करना कठिन हो गया।
  • हालांकि, रूस ने SPFS (System for Transfer of Financial Messages) नामक एक वैकल्पिक प्रणाली विकसित कर ली थी, जिससे उसका व्यापार पूरी तरह नहीं रुका।
  • रूस और चीन ने CIPS (Cross-Border Interbank Payment System) के माध्यम से SWIFT पर निर्भरता कम करने की कोशिश की।

3. वेनेजुएला पर प्रतिबंध

  • अमेरिका ने वेनेजुएला की सरकार (निकोलस मादुरो) पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए SWIFT के जरिए कई वित्तीय लेन-देन पर प्रतिबंध लगाया।
  • इसका असर वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था और तेल निर्यात पर पड़ा, जिससे देश में आर्थिक संकट गहरा गया।

4. चीन और अन्य देशों के लिए खतरा

  • चीन की बढ़ती आर्थिक ताकत को देखते हुए यह आशंका जताई जाती है कि अमेरिका और यूरोपीय संघ भविष्य में चीन के बैंकों पर भी SWIFT प्रतिबंध लगा सकते हैं।
  • यही कारण है कि चीन ने CIPS नामक अपनी स्वतंत्र भुगतान प्रणाली तैयार की है और डिजिटल युआन (CBDC) को बढ़ावा दे रहा है।

SWIFT का राजनीतिक हथियार के रूप में उपयोग क्यों संभव है?

  1. मुख्यालय बेल्जियम में होने के बावजूद अमेरिकी दबदबा
    • SWIFT के लेन-देन का बड़ा हिस्सा अमेरिकी डॉलर में होता है, जिससे अमेरिका को इस पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण मिल जाता है।
  2. अमेरिका और यूरोपीय संघ का दबाव
    • SWIFT पर अमेरिकी और यूरोपीय सरकारों का प्रभाव इतना अधिक है कि वे जब चाहें किसी देश के बैंकों को इससे बाहर कर सकते हैं।
  3. विकल्पों की कमी
    • दुनिया के ज्यादातर बैंक अभी भी SWIFT पर निर्भर हैं, जिससे अमेरिका और यूरोपीय संघ इस पर अपनी पकड़ बनाए रखते हैं।

निष्कर्ष

SWIFT एक तटस्थ वित्तीय संचार प्रणाली होनी चाहिए, लेकिन अमेरिका और यूरोपीय संघ ने इसे कई बार आर्थिक प्रतिबंधों के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है। ईरान, रूस और वेनेजुएला इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इस वजह से अब कई देश SWIFT पर निर्भरता कम करने के लिए नए विकल्प विकसित कर रहे हैं, जिससे भविष्य में अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती मिल सकती है।

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