सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

भारत में Gen Z की जॉब और बिज़नेस मानसिकता: एक नया दृष्टिकोण

Gen Z, यानी 1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी,

पारंपरिक नौकरी और व्यवसाय के पुराने ढर्रे को तोड़ते हुए नई संभावनाओं और डिजिटल अवसरों की ओर बढ़ रही है। यह पीढ़ी सिर्फ एक स्थिर जॉब तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि रिमोट वर्क, फ्रीलांसिंग, स्टार्टअप्स और मल्टीपल इनकम सोर्स को अपनाकर स्वतंत्र और लचीला करियर चाहती है।

आज Gen Z के लिए कंफर्टेबल और फिक्स्ड जॉब से ज्यादा स्किल-बेस्ड करियर, डिजिटल एंटरप्रेन्योरशिप और क्रिएटिव इंडस्ट्रीज़ महत्वपूर्ण हो गई हैं। यह पीढ़ी टेक्नोलॉजी-संचालित है और सोशल मीडिया, डिजिटल मार्केटिंग, स्टॉक ट्रेडिंग, गेमिंग, और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग जैसे अनोखे करियर विकल्पों को भी अपना रही है।

इसके अलावा, स्टार्टअप संस्कृति का प्रभाव भी बढ़ रहा है, जहां Gen Z ई-कॉमर्स, क्लाउड किचन, कंटेंट क्रिएशन, और सस्टेनेबल ब्रांड्स जैसे क्षेत्रों में अपना बिज़नेस शुरू कर रही है। वे सिर्फ पैसा कमाने के लिए नहीं, बल्कि अपने जुनून (Passion) को फॉलो करने और कुछ नया बनाने की चाहत रखते हैं।

इस लेख में हम जानेंगे कि भारत में Gen Z किस तरह से नौकरी और व्यवसाय को देखती है, कौन-से करियर ट्रेंड्स उभर रहे हैं, और यह पीढ़ी किस तरह से भविष्य के वर्कप्लेस को आकार दे रही है।


आप "जेनज़ी" (Gen Z) यानी जनरेशन Z के बारे में पूछ रही हैं, जो उन लोगों को संदर्भित करता है जो लगभग 1997 से 2012 के बीच जन्मे हैं। यह पीढ़ी डिजिटल युग में पली-बढ़ी है और तकनीक, सोशल मीडिया, और ऑनलाइन ख़रीदारी (E-commerce) से गहराई से जुड़ी हुई है।

भारत में Gen Z की ख़रीददारी (Purchasing) आदतें

भारत में Gen Z उपभोक्ताओं की कुछ खास विशेषताएँ हैं:

  1. ऑनलाइन शॉपिंग की ओर झुकाव – यह पीढ़ी Amazon, Flipkart, Myntra, Nykaa जैसी ऑनलाइन वेबसाइटों से ख़रीदारी करना पसंद करती है।

  2. ब्रांड से ज़्यादा गुणवत्ता पर ध्यान – इन्हें महंगे ब्रांड से ज़्यादा प्रोडक्ट की क्वालिटी और यूज़र रिव्यू महत्वपूर्ण लगते हैं।

  3. सोशल मीडिया का प्रभावInstagram, YouTube, और Snapchat जैसी सोशल मीडिया साइट्स इनके ख़रीददारी के फ़ैसलों पर गहरा असर डालती हैं।

  4. इको-फ्रेंडली और एथिकल प्रोडक्ट्स – पर्यावरण के प्रति जागरूक होने के कारण यह पीढ़ी सस्टेनेबल (Sustainable) प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता देती है।

  5. डिजिटल पेमेंट और Buy Now, Pay Later (BNPL) ट्रेंड – यह पीढ़ी कैश से ज़्यादा UPI, Paytm, PhonePe, और क्रेडिट EMI ऑप्शंस का उपयोग करती है।

  6. फैशन और ब्यूटी में रुचिस्ट्रीटवियर फैशन, कस्टमाइज़्ड प्रोडक्ट्स और स्किनकेयर/ब्यूटी प्रोडक्ट्स में इनकी ज़्यादा रुचि होती है।

  7. लोकल और इंडी ब्रांड्स को सपोर्ट – बड़े ब्रांड्स के साथ-साथ यह लोग छोटे लोकल और इंस्टाग्राम बिजनेस से भी ख़रीदारी करते हैं।

भारत में Gen Z का फूड पैटर्न (खाने-पीने की आदतें)


Gen Z की फूड चॉइस पारंपरिक खाने से अलग और काफी ट्रेंडी होती है। यह पीढ़ी स्वाद, सुविधा और हेल्दी लाइफस्टाइल को ध्यान में रखते हुए खाना पसंद करती है।


1. फ़ास्ट फूड और स्नैक्स की दीवानगी


पिज्जा, बर्गर, मोमोज, फ्राइज़, और रोल्स सबसे ज़्यादा पसंद किए जाते हैं।

स्ट्रीट फ़ूड का क्रेज़ बरकरार है, लेकिन हाइजीन का भी ध्यान रखा जाता है।

इंस्टाग्राम-फ्रेंडली फूड्स जैसे कोरियन फ़ूड, चीज़ पुल पिज्जा, और ड्रामेटिक ड्रिंक्स ट्रेंड में रहते हैं।


2. हेल्दी और ऑर्गेनिक फूड की ओर रुझान


ग्लूटेन-फ्री, ऑर्गेनिक और प्लांट-बेस्ड फूड को प्राथमिकता दी जा रही है।

प्रोटीन शेक्स, स्मूदीज़, कस्टमाइज़्ड हेल्दी बाउल्स का क्रेज़ बढ़ा है।

कम कैलोरी वाले स्नैक्स जैसे मखाना, क्विनोआ चिप्स, और ग्रेनोला बार्स पॉपुलर हैं।



3. फूड डिलीवरी ऐप्स की बढ़ती निर्भरता


Swiggy, Zomato, और Blinkit जैसी ऐप्स से ऑनलाइन फूड ऑर्डर करना पसंद करते हैं।

"10 मिनट डिलीवरी" और कस्टमाइज़्ड फूड ऑप्शन इन्हें आकर्षित करते हैं।

डील्स और डिस्काउंट पर ख़रीददारी करने की प्रवृत्ति होती है।


4. नए और एक्सपेरिमेंटल फ्लेवर्स आज़माना पसंद


जापानी सुशी, थाई करी, कोरियन रेमन, मैक्सिकन टैकोस जैसे ग्लोबल फूड्स को अपनाया जा रहा है।

फ्यूज़न फ़ूड (जैसे बटर चिकन पिज्जा, पाव भाजी टैको, गोलगप्पा शॉट्स) का ट्रेंड बढ़ रहा है।


5. कैफ़े और क्यूरेटेड एक्सपीरियंस की डिमांड


सिर्फ खाने के लिए नहीं, बल्कि एंबियंस और इंस्टाग्रामेबल कैफ़े की तलाश होती है।

थीम-बेस्ड कैफ़े, रेट्रो-स्टाइल कैफ़े, और स्ट्रीट-फूड एक्सपीरियंस को पसंद करते हैं।


6. होम-कुकिंग और DIY फूड ट्रेंड


लॉकडाउन के बाद घर पर खाना बनाने और नए रेसिपी ट्राय करने का शौक़ बढ़ा है।

Instagram, YouTube और Reels से इंस्पायर होकर लोग DIY फ़ूड (जैसे डलगोना कॉफी, पिज़्ज़ा फ्रॉम स्क्रैच) ट्राय कर रहे हैं।


7. "कॉफी कल्चर" और स्पेशल ड्रिंक्स का क्रेज़


कोल्ड ब्रू, बोबा टी, स्पेशलटी कॉफी, मॉकटेल्स काफी लोकप्रिय हैं।

कैफ़े में बैठकर वर्क-फ्रॉम-होम करने या दोस्तों से मिलने का ट्रेंड ज़्यादा है।


भारत में Gen Z का कपड़ों का ट्रेंड और खरीदारी पैटर्न


Gen Z का फैशन सेंस पारंपरिक और मॉडर्न स्टाइल का मिक्स होता है। यह पीढ़ी कंफर्ट, ट्रेंड और सेल्फ-एक्सप्रेशन को ध्यान में रखकर कपड़े खरीदती है। सोशल मीडिया, सेलिब्रिटी स्टाइल और इन्फ्लुएंसर्स का इनकी फैशन चॉइस पर गहरा प्रभाव पड़ता है।


1. ऑनलाइन शॉपिंग का दबदबा


Myntra, Ajio, Urbanic, H&M, Nykaa Fashion, और Flipkart जैसी वेबसाइट्स से खरीदारी करना पसंद करते हैं।

इंस्टाग्राम और छोटे ऑनलाइन ब्रांड्स से भी कस्टमाइज़्ड और ट्रेंडी कपड़े खरीदते हैं।

फ्लैश सेल, डिस्काउंट और Buy Now, Pay Later (BNPL) ऑप्शंस को प्राथमिकता देते हैं।


2. स्ट्रीटवियर और कैजुअल फैशन का क्रेज़

Baggy Jeans, Oversized T-Shirts, Hoodies, Sneakers, और Cargo Pants का ट्रेंड काफी लोकप्रिय है।

ग्राफिक प्रिंटेड टी-शर्ट्स, Y2K फैशन और स्ट्रीट स्टाइल जैकेट्स Gen Z को खूब पसंद आते हैं।

Unisex और Gender-neutral फैशन की ओर झुकाव बढ़ रहा है।


3. एथलीजर और कंफर्टेबल फैशन की मांग


Joggers, Sweatpants, Co-ord Sets और Activewear का चलन तेजी से बढ़ रहा है।

यह पीढ़ी Nike, Adidas, Puma, HRX और Decathlon जैसे ब्रांड्स से एथलीजर खरीदना पसंद करती है।

वर्कआउट और डेली लाइफ में लूज़-फिट और breathable कपड़े पसंद किए जाते हैं।



4. एथनिक और इंडो-वेस्टर्न फ्यूजन


ट्रेडिशनल कपड़े भी फ्यूज़न स्टाइल में पसंद किए जाते हैं, जैसे धोती पैंट्स, कुर्ता सेट्स, और शरारा।

Boho और Minimalist फैशन का भी ट्रेंड है।

त्योहारों और वेडिंग्स में Sustainable और Eco-friendly एथनिक वियर की डिमांड बढ़ रही है।


5. विंटेज और Y2K फैशन की वापसी


Mom Jeans, Crop Tops, Corsets, Mini Skirts और Chunky Sneakers का ट्रेंड Gen Z को आकर्षित कर रहा है।

90s और 2000s के फैशन एलिमेंट्स (जैसे Butterfly Clips, Denim on Denim, और Leather Jackets) फिर से फैशन में हैं।


6. कस्टमाइजेशन और थ्रिफ्ट फैशन का बढ़ता क्रेज़


DIY (Do It Yourself) और कस्टम प्रिंटेड कपड़े (जैसे पेंटेड डेनिम जैकेट्स, एंब्रॉयडरी वाले कपड़े) ट्रेंड में हैं।

Thrift Stores और प्री-लव्ड कपड़ों की खरीदारी (Instagram Thrift Pages, Thrift India) भी बढ़ रही है।

Fast Fashion की जगह Slow Fashion और Sustainable Fashion को प्राथमिकता दी जा रही है।


7. फैशन में सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर्स का असर


Instagram Reels, Pinterest, और YouTube Influencers के जरिए फैशन ट्रेंड सेट होते हैं।

लोग Korean Fashion, Celebrity Looks, और Street Style Bloggers से इंस्पायर होते हैं।

Aesthetic Looks (जैसे Soft Girl, E-Girl, Dark Academia, और Cottagecore) ट्रेंड में हैं।


8. लोकल और इंडी ब्रांड्स को सपोर्ट


बड़े ब्रांड्स के साथ-साथ Gen Z इंडियन स्टार्टअप्स और लोकल डिज़ाइनर्स को भी सपोर्ट कर रही है।

Handmade, Sustainable, और Upcycled फैशन को पसंद किया जा रहा है।


निष्कर्ष


भारत में Gen Z का फैशन पैटर्न कंफर्ट, स्टाइल, और ट्रेंड का मिक्स है। यह पीढ़ी ऑनलाइन शॉपिंग, स्ट्रीटवियर, एथलीजर, और कस्टमाइज़्ड फैशन को ज़्यादा प्राथमिकता देती है। वे ब्रांडेड और लोकल दोनों ऑप्शंस के लिए ओपन हैं और सस्टेनेबल फैशन की ओर भी रुझान बढ़ रहा हैं।

भारत में Gen Z की फूड चॉइस ट्रेडिशनल और मॉडर्न का मिक्स है। यह पीढ़ी टेक्नोलॉजी-ड्रिवन है, इसलिए ऑनलाइन फूड ऑर्डरिंग और सोशल मीडिया ट्रेंड्स इनकी पसंद पर गहरा असर डालते हैं। हेल्दी, क्विक, और यूनिक फूड ऑप्शंस की माँग बढ़ रही है। साथ ही यूट्यूब पर भी इनका खूब समय बीतता है ।




टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

बिहार की राजनीति में “प्रयोग” क्यों असफल हुआ? जनता ने नीयत को तवज्जो दी, अभिनय को नहीं"

"बिहार की राजनीति में “प्रयोग” क्यों असफल हुआ? जनता ने नीयत को तवज्जो दी, अभिनय को नहीं" बिहार की राजनीति हमेशा देश के लिए एक संकेतक रही है यहाँ नेता सिर्फ़ भाषणों से नहीं, बल्कि अपने चरित्र, विश्वसनीयता और  ज़मीनी जुड़ाव से पहचाने जाते हैं। हाल के चुनावों ने इस सत्य को एक बार फिर प्रमाणित कर दिया। पिछले दो वर्षों में बिहार की राजनीति में एक नया “आयातित प्रयोग” उतरा एक ऐसा नेता जो विकास मॉडल का दावा करता रहा, जिसने खुद को विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन उसकी रणनीति कागज़ पर जितनी आकर्षक दिखती थी, जमीन पर उतनी ही खोखली साबित हुई। यह प्रयोग कुछ लोगों को “नई राजनीति” का प्रतीक लग सकता था, लेकिन बिहार की जनता ने इसे तुरंत समझ लिया कि नीयत और अभिनय में फर्क होता है। बड़े दावे, बड़े वादे… और बड़ी पराजय इस नए राजनीतिक प्रयोग ने चुनाव से पहले दो तेज़ हमलावर घोषणाएँ कीं  “150 सीट से कम मिली तो राजनीति छोड़ दूँगा।” “अगर जेडीयू 25 से ऊपर गई, तो सार्वजनिक जीवन से हट जाऊँगा।” इन दावों के पीछे रणनीति थी कि जनता भावनात्मक रूप से प्रभावित होकर नए विकल्प को स्वीकार कर लेगी। ...

बोरॉन की तलाश में पाकिस्तान: परमाणु सुरक्षा के लिए वैश्विक दरवाज़ों पर दस्तक

बोरॉन की तलाश में पाकिस्तान: परमाणु सुरक्षा के लिए वैश्विक दरवाज़ों पर दस्तक हाल ही में पाकिस्तान के एक परमाणु ठिकाने पर हुए मिसाइल हमले के बाद, पूरे देश में परमाणु सुरक्षा को लेकर चिंता गहरा गई है। इस संकट की घड़ी में पाकिस्तान जिस रासायनिक तत्व को सबसे अधिक खोज रहा है, वह है — बोरॉन (Boron)। परमाणु रिएक्टर में न्यूट्रॉन संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक इस तत्व की आपातकालीन मांग ने पाकिस्तान को कई देशों के दरवाज़े खटखटाने पर मजबूर कर दिया है। बोरॉन क्यों है इतना जरूरी? बोरॉन एक ऐसा रासायनिक तत्व है जो न्यूट्रॉन को अवशोषित कर सकता है। परमाणु रिएक्टरों में जब न्यूट्रॉन की गतिविधि असंतुलित हो जाती है — जैसे मिसाइल हमले के बाद हुआ — तब बोरॉन डालने से रिएक्शन को धीमा किया जा सकता है और एक बड़े हादसे से बचा जा सकता है। यही वजह है कि पाकिस्तान इसे किसी भी कीमत पर जल्द से जल्द हासिल करना चाहता है। किन देशों से मांग रहा है पाकिस्तान बोरॉन? 1. चीन (China) पाकिस्तान का सबसे करीबी रणनीतिक साझेदार चीन, बोरॉन का एक बड़ा उत्पादक देश है। चीन पहले से पाकिस्तान को रक्षा, परमाणु और तकनीकी सहायता देता रहा ...

"खबर नहीं, नजरिया बेच रहा है मीडिया!"

  1. भारत का मीडिया अभी किसके साथ है? भारत में मीडिया का एक बड़ा वर्ग सरकार समर्थक रुख अपनाए हुए दिखता है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि पूरा मीडिया पक्षपाती हो गया है। भारतीय मीडिया को मोटे तौर पर तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है: (A) सरकार समर्थक मीडिया (Pro-Government Media) इस वर्ग में मुख्य रूप से बड़े टीवी चैनल, समाचार पत्र और डिजिटल पोर्टल शामिल हैं, जो सत्ताधारी दल (अभी भाजपा) के समर्थन में खुले तौर पर रिपोर्टिंग करते हैं। विशेषता: इनकी खबरों में सरकार की नीतियों की प्रशंसा अधिक दिखती है, विपक्ष को नकारात्मक रूप में पेश किया जाता है। उदाहरण: ज़ी न्यूज़, रिपब्लिक टीवी, इंडिया टीवी, एबीपी न्यूज़ जैसे चैनल अकसर भाजपा की नीतियों के पक्ष में कवरेज करते हैं। (B) विपक्ष समर्थक मीडिया (Pro-Opposition Media) यह वर्ग अल्पसंख्यक है और अधिकांश डिजिटल पोर्टल और कुछ प्रिंट मीडिया संस्थान इसमें शामिल हैं। ये सरकार की आलोचना को प्राथमिकता देते हैं। विशेषता: ये सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हैं और विपक्ष को ज्यादा मंच देते हैं। उदाहरण: NDTV (अब अडानी समूह के अधिग्रहण के ब...