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पाकिस्तानी परमाणु ठिकानों पर सैन्य कार्यवाही से पाकिस्तान में खलबली

बोरॉन बना पाकिस्तान की परमाणु सुरक्षा का संकटमोचक मिसाइल हमले के बाद मची खलबली


हाल ही में पाकिस्तान के एक संवेदनशील इलाके में हुए "ऑपरेशन सिंदूर" नामक मिसाइल हमले ने पूरे दक्षिण एशिया को हिला कर रख दिया है। इस हमले में निशाना बना पाकिस्तान का एक गुप्त परमाणु हथियार केंद्र, जिससे भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। हमले के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पाकिस्तान ने बोरॉन (Boron) की आपातकालीन माँग की है।


क्यों पड़ी बोरॉन की ज़रूरत?


पाकिस्तान के परमाणु रिएक्टर पर मिसाइल से हुए हमले के बाद वहाँ का न्यूट्रॉन संतुलन बिगड़ गया। रिएक्टर को ओवरहीटिंग और विस्फोट से बचाने के लिए बोरॉन की मदद ली जाती है, क्योंकि यह न्यूट्रॉन को अवशोषित कर परमाणु प्रतिक्रिया को धीमा करता है। ऐसे में बोरॉन ही वह तत्व है जो एक बड़े परमाणु हादसे को टाल सकता है।


क्या भारत ने किया मिसाइल हमला?


पाकिस्तानी मीडिया और रक्षा सूत्रों का दावा है कि इस हमले के पीछे भारत की "गुप्त सैन्य कार्रवाई" हो सकती है। हालांकि भारत सरकार की तरफ से ऐसे किसी भी हमले से साफ इनकार किया गया है। भारत का कहना है कि "यह आरोप पूरी तरह निराधार और राजनीतिक एजेंडे से प्रेरित हैं।"


बोरॉन के अन्य फायदे:


परमाणु संयंत्रों में दुर्घटनाओं से बचाव।


कैंसर उपचार (BNCT थेरेपी) में प्रयोग।


फसलों की उपज बढ़ाने और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में सहायक।


सेमीकंडक्टर और हाई-टेक उपकरणों में उपयोगी।


बोरॉन अब सिर्फ एक रसायन नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की रणनीतिक सुरक्षा का अहम हथियार बन चुका है। मिसाइल हमले के बाद पाकिस्तान की हड़बड़ाहट और बोरॉन की मांग ने साफ कर दिया है कि परमाणु हथियार सिर्फ युद्ध नहीं, तकनीक और विज्ञान के नियंत्रण से भी जुड़े हुए हैं।



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