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शिक्षिका से शासिका तक – मैक्रों का मोहपाश”

 

कहते हैं इश्क़ ना उम्र देखता है, ना दर्जा। पर इमैनुएल मैक्रों साहब ने तो इस कहावत को इतिहास में अमर कर दिया।

प्रेम की पृष्ठभूमि – 'शिक्षा से शिकार तक'

साल था 1993। स्थान: फ्रांस का एक स्कूल।

एक होनहार,15 वर्षीय छात्र — इमैनुएल मैक्रों।

और दूसरी ओर, उनकी 39 वर्षीय नाट्य-शिक्षिका — ब्रिजिट।


ब्रिजिट जी उस समय स्कूल की "ड्रामा क्लास" लेती थीं, लेकिन उनकी खुद की जिंदगी का ड्रामा भी यहीं से शुरू कर बैठीं।


उन्होंने क्लास में डायलॉग सिखाया — "Je t’aime" (I love you)... और छात्र मैक्रो ने सीधा दिल पर ले लिया!


मैक्रों ने कहा —

“मैम, एक न एक दिन मैं आपसे शादी करूंगा।”

ब्रिजिट ने पहले कहा — चलो पहले “पढ़ाई पर ध्यान दो, ये बचपना छोड़ो ।”


पर फिर सोचा, "बच्चा है, पर समझदार है!"

जब ये लव स्टोरी परिवारों को पता चली, तो भूकंप आ गया।


घर वालों ने मैक्रों को पेरिस भेज दिया। 

मैक्रों के माता-पिता ने कहा — "हमारा बेटा राजनीति में जाएगा, प्रेम में नहीं।"


पर ब्रिजिट अड़ी रहीं, और बोलीं —

"मैं रचूंगी नया इतिहास राजनीति में और प्रेम में भी!"


और देखिए — 24 वर्ष बडी इस उम्र दराज महिला से 2007 में  मैक्रो की शादी हो गई, 

और 2017 में वही लड़का फ्रांस का राष्ट्रपति बन गया! अब समझ आया “मैम” की दूरदृष्टि कैसी थी?


इतने वर्षों के "ड्रामा" के बाद, हाल ही में वियतनाम की धरती पर इस प्रेम कहानी का एक नया अध्याय लिखा गया — एक थप्पड़ से!

जिस टीचर ने कभी अभिनय सिखाया, उसी ने अब सीन भी डाइरेक्ट कर डाला है।


मैक्रों की प्रेम कहानी हमें सिखाती है कि —


अगर आपके इरादे नेक हों और प्रेम में धैर्य हो,

तो आप अपने टीचर से भी शादी कर सकते हैं।

और राष्ट्रपति बनने के बाद भी "होमवर्क" (थप्पड़ सहित) पूरा करना पड़ेगा।


हालांकि राष्ट्रपति मैक्रो इसे प्रेम की चपत बता रहे है। पर हक़ीक़त वो भी जानते हैं ,कि इसमे प्रेम नदारत था।


वियतनाम की धरती पर जैसे ही फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का विमान उतरा, दुनिया की निगाहें उनके कूटनीतिक एजेंडे पर थीं।


लेकिन श्रीमान राष्ट्रपति की पत्नी ब्रिजिट मैक्रों तो  कुछ और ही तय कर के आई थीं कि बार सुर्खियों में विदेश नीति नहीं होगी।


हवाई जहाज़ का जैसे ही दरवाज़ा खुला, गाल पर 

थप्पड खाये राष्ट्रपति महोदय ने बिना गाल सहलाये अपनी मुस्कान समेटी, बालों पर हाथ फेरा, और कैमरे की ओर आत्मविश्वास से बढ़े।


लाल ड्रेस वाले दो हाथ उनके चहरे पर आसानी से देखे जा सकते थे। मैडम ने बता दिया कि फर्स्ट लेडी बनने के बाद भी उनके अन्दर का  टीचर जीवित है। वे सार्वजनिक मंच पर भी पाठ पढा सकती हैं!  


प्रेम अंधा होता हैं उसका प्रत्यक्ष है — ब्रिजिट मैक्रों। हैडसम राष्ट्रपती मैक्रो ने उनमे क्या देखा ये तो मैक्रो ही जाने !

राष्ट्रपति महोदय ने झूठी मुस्कान ओढ़ी, और जैसे ही नीचे उतरने लगे, पत्नी का हाथ थामने की कोशिश की उन्हें अपनी कोहनी भी देने की कोशिश की। लेकिन नहीं! भडकी हुईं फ्रांस की प्रथम महिला ने स्पष्ट संकेत दे दिया — “मैं रेलिंग पकड़ के उतर लूंगी, आप अपनी लोकप्रियता संभालिए।”

सोशल मीडिया पर तूफ़ान आ गया। किसी ने लिखा — 

“थप्पड़ नहीं, प्रेम की चपत थी।”

किसी ने कहा —

“पॉलिटिकल स्लैपड्रामा 2025 – Directed by Brigitte.”

ट्विटर पर मीम की बाढ़ आ गई ।

किसी ने लिखा ...

"क्लास टीचर से पत्नी बनीं ब्रिजिट ने फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों को मारा थप्पड़!"

वियतनाम में उतरते ही वायरल वीडियो में साफ़ दिखता है —

देश का सबसे ताकतवर इंसान भी घरेलू हिंसा से अछूता नहीं।

तो किसी ने कहा- 

"इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि पति कौन है —

चाहे वो एक फौजी हो, रॉकेट वैज्ञानिक हो, पायलट हो, अरबपति हो, समाजसेवी हो, ऑटो चालक हो या फिर फ्रांस का राष्ट्रपति —

वह कभी भी अपनी पत्नी द्वारा किए गए घरेलू हिंसा से अछूता नहीं रह सकता।"

फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय ने स्थिति को संभालते हुए कहा —

“यह तो पति-पत्नी के बीच का मज़ाक था।”

यानी जब पब्लिक में गाल पर चांटा पड़े, तो उसे ‘निजी विनोद’ कह देना कूटनीति की नई परिभाषा है।

अब सवाल यह नहीं रहा कि राष्ट्रपति कौन है या दौरा किस देश का था। असली मुद्दा यह है कि आप चाहे फ्रांस के राष्ट्रपति हों या अपने किसी वार्ड के पार्षद अगर आपकी पत्नी चाहें, तो "डिप्लोमैटिक चांटा" कहीं भी और कभी भी जड सकती है।

अक्सर घरेलू हिंसा को केवल महिलाओं के संदर्भ में देखा जाता है, लेकिन पुरुष भी इसके शिकार हो सकते हैं। समाज में यह एक अदृश्य सत्य है, जिसे बोलने की हिम्मत बहुत कम लोग करते हैं।

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