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"खेती की आड़ में टैक्स चोरी – सैटेलाइट से खुली पोल!"


फिलहाल, मोदी सरकार ने खेती की आय पर इनकम टैक्स लगाने का कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया है। हालांकि, सरकार के पास इस पर विचार-विमर्श जरूर हुआ है, क्योंकि बड़े किसानों के नाम पर टैक्स चोरी की खबरें लगातार आ रही हैं।


वित्त मंत्रालय और सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (CBDT) ने कृषि आय में हो रही टैक्स चोरी पर रिपोर्ट तैयार की थी, लेकिन सरकार ने इसे सार्वजनिक नहीं किया।


वर्तमान में, किसानों की आय पर इनकम टैक्स नहीं लगता है, चाहे उनकी कमाई कितनी भी हो।


2. खेती से कमाई को लेकर क्या कानून है?


भारत में खेती से होने वाली आय पर इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 10(1) के तहत छूट है। इसका मतलब है कि कृषि से होने वाली आय पर कोई टैक्स नहीं लगता, चाहे वह कितनी भी अधिक हो।

इसमें फसल उत्पादन, बागवानी, मवेशी पालन, डेयरी फार्मिंग आदि शामिल हैं।

हालांकि, अगर कोई व्यक्ति खेती से जुड़े कारोबार जैसे एग्रो-प्रोसेसिंग, फार्म-हाउस किराया, ठेके पर खेती देने से आय कमाता है, तो उस पर टैक्स लगता है।


 3. खेती की आड़ में क्या देश में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी हो रही है?

हां, खेती की आड़ में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी हो रही है।

कई बड़े उद्योगपति, व्यापारी और राजनेता अपनी काली कमाई को कृषि आय दिखाकर टैक्स बचा रहे हैं।


CBDT की रिपोर्ट के मुताबिक, 2019-20 में करीब 4,500 लोगों ने 1 करोड़ से ज्यादा की कृषि आय दिखाई, लेकिन जांच में पता चला कि असल में उन्होंने खेती नहीं की थी।

खेती की आड़ में बेनामी संपत्ति खरीदने, हवाला लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे खेल भी खेले जा रहे हैं।


4. सैटेलाइट की मदद से इनकम टैक्स विभाग ने टैक्स चोरी का पता कैसे लगाया है?

इनकम टैक्स विभाग ने ISRO और NRSC (नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर) की सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल किया है।

सैटेलाइट से खेती योग्य जमीन और उसकी उपज की तस्वीरें ली जाती हैं।

जो व्यक्ति खेती की आय दिखाकर टैक्स बचा रहे थे, उनकी जमीन पर असली में खेती हो रही है या नहीं, इसकी पुष्टि की गई।

कई मामलों में पाया गया कि जिन लोगों ने करोड़ों की कृषि आय दिखाई थी, उनके खेत बंजर थे या वहां निर्माण हो चुका था।


5. क्या भारत में किसानों की इनकम बढ़ी है? देश में कितने धनी किसान हैं?

भारत में छोटे किसानों की आय में मामूली वृद्धि हुई है, लेकिन बड़े किसानों और एग्री-प्रेन्योर्स (कृषि उद्यमियों) की कमाई में भारी इजाफा हुआ है।

NITI Aayog की रिपोर्ट के अनुसार, 2015-2022 के बीच किसानों की औसत मासिक आय 6,426 रुपये से बढ़कर 10,218 रुपये हुई है।

हालांकि, देश में करीब 1.5% किसान ही करोड़पति हैं, जिनके पास बड़े स्तर पर खेती की जमीन और एग्री-बिजनेस है।

पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक जैसे राज्यों में सबसे ज्यादा अमीर किसान हैं, जिनकी सालाना आय करोड़ों में है।

कई जगहों पर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) योजना का भी दुरुपयोग हो रहा है।


"बच्चों के नाम खेत कर के ,सरकार को लगा रहे है चूना"

कैसे कर रहे है गड़बड़ी?


PM-Kisan योजना के तहत किसानों को सालाना 6,000 रुपये (तीन किश्तों में) दिए जाते हैं।


इस योजना का लाभ केवल छोटे और सीमांत किसानों के लिए है, लेकिन कई बड़े किसान अपने बच्चों, रिश्तेदारों या अन्य सदस्यों के नाम पर जमीन का बंटवारा दिखाकर गलत तरीके से लाभ उठा रहे हैं।


किसान जमीन को कागजों में अलग-अलग हिस्सों में बांटकर अपने बच्चों के नाम करा देते हैं, जबकि असल में खेत संयुक्त होता है।

इस तरह वे प्रति व्यक्ति 6,000 रुपये का लाभ ले रहे हैं, भले ही असल में वे बड़े किसान हों और उन्हें इसकी जरूरत न हो।


 इससे क्या नुकसान हो रहा है?

सरकार का पैसा गलत हाथों में जा रहा है, जबकि छोटे और वास्तविक किसानों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा।

कई जगह फर्जी किसान खातों के जरिए भी पैसा निकाला जा रहा है।


राजनीतिक संरक्षण में कुछ बिचौलिए किसानों के नाम पर फर्जीवाड़ा करके पैसा हड़प रहे हैं।


सरकार की कार्रवाई:


सरकार अब सैटेलाइट इमेजिंग और डिजिटल भू-अभिलेखों के माध्यम से ऐसे फर्जी किसानों की पहचान कर रही है।

आधार लिंकिंग और ई-केवाईसी अनिवार्य कर दी गई है, ताकि फर्जी लाभार्थियों को योजना से बाहर किया जा सके।

2024 में केंद्र सरकार ने 1.8 करोड़ फर्जी लाभार्थियों को योजना से हटाया था।


निष्कर्ष:

कई किसान जमीन का कागजी बंटवारा दिखाकर अपने बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों को किसान बताकर सरकारी लाभ ले रहे हैं। इससे छोटे और असली किसानों का हक मारा जा रहा है। सरकार इस पर सख्ती से कार्रवाई कर रही है, लेकिन अभी भी कई जगह भ्रष्टाचार जारी है।

मोदी सरकार ने फिलहाल खेती पर इनकम टैक्स लगाने का कोई निर्णय नहीं लिया है, लेकिन सैटेलाइट से टैक्स चोरी पकड़ने का काम जारी है। देश में बड़े किसानों और कारोबारी किसानों की आय तेजी से बढ़ी है, जबकि छोटे किसान अब भी संघर्ष कर रहे हैं।


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