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चीन के खिलाफ भारत की आर्थिक रणनीति

 भारत की चीन के खिलाफ आर्थिक रणनीति का उद्देश्य अपने घरेलू उद्योगों को मजबूत करना, चीनी आयात पर निर्भरता कम करना, और वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भूमिका बढ़ाना है। यह रणनीति मुख्यतः आत्मनिर्भर भारत अभियान, चीन के साथ व्यापार घाटे को कम करने, और वैश्विक आर्थिक संबंधों में विविधता लाने पर आधारित है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:


1. चीन से आयात पर निर्भरता घटाना


पृष्ठभूमि:

भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा लंबे समय से चिंता का विषय है। 2022-23 में यह घाटा $83 बिलियन तक पहुंच गया था।


उद्देश्य:


भारतीय उद्योगों को सशक्त बनाना।


चीनी वस्तुओं पर निर्भरता घटाकर आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना।


उठाए गए कदम:


एंटी-डंपिंग ड्यूटी:

चीन से आयातित सामानों पर अतिरिक्त शुल्क लगाकर घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन।


सख्त गुणवत्ता नियंत्रण:

खिलौनों, इलेक्ट्रॉनिक्स, और फार्मास्युटिकल्स सहित अन्य उत्पादों के लिए गुणवत्ता मानक लागू करना।


लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा:


'मेक इन इंडिया' और 'प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI)' स्कीम के तहत मोबाइल फोन, सेमीकंडक्टर, और अन्य उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देना।


MSME और स्टार्टअप्स को सब्सिडी और वित्तीय सहायता प्रदान करना।


2. टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर


डिजिटल इंडिया:


भारत ने 5G और 6G टेक्नोलॉजी में चीनी कंपनियों की भूमिका को सीमित किया।


स्वदेशी कंपनियों जैसे Jio और Airtel को प्राथमिकता दी गई।



इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट:


भारत ने सड़क, रेल, और पोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश किया है ताकि चीनी निवेशकों पर निर्भरता कम हो।


गलवान संघर्ष के बाद चीन से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को रद्द किया गया।


3. वैश्विक सप्लाई चेन में भूमिका बढ़ाना


चीन-प्लस-वन नीति:


वैश्विक कंपनियों को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया गया ताकि वे चीन के साथ अपने उत्पादन को सीमित करें।


Apple, Samsung, और Foxconn जैसी कंपनियों ने भारत में अपने प्रोडक्शन हब स्थापित किए।



फ्रेंडशोरिंग:


अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, और यूरोपीय देशों के साथ साझेदारी कर सप्लाई चेन को स्थिर बनाना।


4. चीन से आयातित उत्पादों का बहिष्कार


सामाजिक और राजनीतिक कदम:


2020 के गलवान संघर्ष के बाद 'बॉयकॉट चाइनीज प्रोडक्ट्स' अभियान को बढ़ावा दिया गया।


टिक टॉक, UC ब्राउज़र, और 200 से अधिक चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध।


सेक्टरल प्रभाव:


इलेक्ट्रॉनिक्स: भारत ने स्मार्टफोन, टीवी, और कंप्यूटर में आत्मनिर्भरता के लिए स्वदेशी उत्पादन बढ़ाया।


खिलौने: चीन से आयात में कमी लाने के लिए स्थानीय उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा।


5. सुरक्षा और साइबरस्पेस में उपाय


डेटा सुरक्षा:


चीनी ऐप्स और टेक्नोलॉजी कंपनियों को भारतीय डेटा तक पहुंचने से रोकने के लिए सख्त कानून।



साइबर सुरक्षा:


चीनी साइबर अटैक्स को रोकने के लिए सरकारी और प्राइवेट सेक्टर में सुरक्षा बढ़ाई गई।


6. चीन के खिलाफ वैश्विक सहयोग


क्वाड (QUAD):

भारत ने अमेरिका, जापान, और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए क्वाड गठबंधन को मजबूत किया।


ट्रेड और डिप्लोमेसी:


RCEP (Regional Comprehensive Economic Partnership) से बाहर रहकर चीन के प्रभुत्व का विरोध।


अन्य एशियाई और अफ्रीकी देशों के साथ व्यापार समझौते।


संभावित चुनौतियाँ


1. घरेलू उत्पादन की प्रतिस्पर्धा:


चीन के सस्ते उत्पादों के कारण घरेलू उत्पादकों को उच्च लागत का सामना करना पड़ता है।


2. वैश्विक आपूर्ति पर असर:


चीन की आर्थिक और तकनीकी ताकत को पूरी तरह से नजरअंदाज करना कठिन है।


निष्कर्ष


भारत की आर्थिक रणनीति चीन के साथ व्यापार संबंधों को कम करते हुए आत्मनिर्भरता और वैश्वि

क कूटनीति में अपनी भूमिका बढ़ाने पर केंद्रित है। इस दिशा में उठाए गए कदम दीर्घकालिक रूप से भारत को आर्थिक और रणनीतिक रूप से मजबूत बना सकते हैं।


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