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COP 28 और जलवायु राजनीति

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP 28) 30 नवंबर से 12 दिसंबर 2023 तक दुबई, संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित हुआ। इस सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिनका उद्देश्य वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C तक सीमित करना और पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करना है। जिसमें लिए गए प्रमुख निर्णय निम्नानुसार है ।


1. जीवाश्म ईंधन पर समझौता


COP 28 के समापन पर एक ऐतिहासिक समझौता हुआ, जिसमें पहली बार जीवाश्म ईंधन के उपयोग को कम करने की दिशा में स्पष्ट संकेत दिए गए। यह समझौता "न्यायसंगत और समान ऊर्जा संक्रमण" की नींव रखता है, जिसमें ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में गहरी कटौती और वित्तीय संसाधनों में वृद्धि शामिल है। 


2. वैश्विक मूल्यांकन (Global Stocktake)


यह पेरिस समझौते के तहत पहला वैश्विक मूल्यांकन था, जिसमें जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विश्व की प्रगति की समीक्षा की गई। इस मूल्यांकन के परिणामस्वरूप देशों को अपनी जलवायु महत्वाकांक्षाओं को बढ़ाने और आवश्यक नीतिगत सुधार करने के लिए प्रेरित किया गया। 


3. जलवायु, राहत, पुनर्प्राप्ति और शांति पर घोषणा


COP 28 में "जलवायु, राहत, पुनर्प्राप्ति और शांति पर घोषणा" प्रस्तुत की गई, जो कमजोर क्षेत्रों में जलवायु लचीलापन बढ़ाने के लिए त्वरित कार्रवाई का आह्वान करती है। यह घोषणा औपचारिक UNFCCC वार्ताओं के बाहर एक गैर-बाध्यकारी आह्वान है, जो मानवीय, विकास, जलवायु और शांति समुदायों की चिंताओं और समाधानों को दर्शाती है। 


4. जलवायु अनुकूलन पर प्रगति


सम्मेलन में जलवायु अनुकूलन के लिए वैश्विक लक्ष्य (Global Goal on Adaptation) पर चर्चा हुई, जिसमें जल-सम्बंधित लक्ष्यों को प्राथमिकता दी गई। इसमें जल-आधारित आपदाओं से निपटने और सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लक्ष्यों का निर्धारण किया गया। 


5. कृषि और खाद्य प्रणाली पर घोषणा


COP 28 में "खाद्य और कृषि पर घोषणा" की गई, जिसमें जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में कृषि और खाद्य प्रणालियों के त्वरित अनुकूलन और परिवर्तन की आवश्यकता पर बल दिया गया। 


6. परमाणु ऊर्जा की भूमिका की मान्यता


सम्मेलन में पहली बार परमाणु ऊर्जा को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के समाधान के रूप में औपचारिक रूप से मान्यता दी गई। 


7. जलवायु वित्त पोषण पर निर्णय


विकसित देशों ने विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के अपने वादों की समीक्षा की। इसमें $100 बिलियन प्रति वर्ष की प्रतिबद्धता को पूरा करने और जलवायु वित्त पोषण के नए स्रोतों की खोज पर चर्चा हुई।


8. नुकसान और क्षति (Loss and Damage) पर कोष की स्थापना


जलवायु परिवर्तन से प्रभावित देशों को मुआवजा देने के लिए "नुकसान और क्षति" कोष की स्थापना पर सहमति बनी, जिससे प्रभावित देशों को वित्तीय सहायता मिल सकेगी।


निष्कर्ष


COP 28 में लिए गए ये निर्णय वैश्विक जलवायु कार्रवाई में महत्वपूर्ण प्रगति का संकेत देते हैं। इनके सफल कार्यान्वयन से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।



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