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एकांकी: "शक्ति का संघर्ष"

 एकांकी: "शक्ति का संघर्ष"


(स्थान: जर्मन साम्राज्य, 1888-1890. मंच पर तीन हिस्से—पहला हिस्सा बिस्मार्क का कार्यालय, दूसरा हिस्सा केसर विलियम II का राजमहल, तीसरा हिस्सा जनता और संसद के बीच बहस का दृश्य।)


पात्र:


1. ऑटो वॉन बिस्मार्क - जर्मनी के चांसलर



2. केसर विलियम II - जर्मन सम्राट



3. अधिकारी 1 और 2 - बिस्मार्क के सहयोगी



4. जर्मन मंत्री - विलियम के समर्थक



5. सेक्रेटरी - संदेशवाहक



6. एक किसान और एक मजदूर - जनता के प्रतिनिधि


दृश्य 1: बिस्मार्क का कार्यालय


(ऑटो वॉन बिस्मार्क अपने डेस्क पर काम कर रहे हैं। एक सेक्रेटरी आता है और एक पत्र सौंपता है।)


सेक्रेटरी:

महाशय, यह केसर का संदेश है। उन्होंने आपकी नीतियों पर चर्चा के लिए आपको बुलाया है।


बिस्मार्क: (मुस्कुराते हुए)

डिस्कशन या डिक्टेशन? विलियम की समस्या यही है—बहस की जगह आदेश देना चाहता है।


(अधिकारी 1 और 2 प्रवेश करते हैं।)


अधिकारी 1:

क्या आपको लगता है, केसर आपकी विदेश नीति का समर्थन करेंगे?


बिस्मार्क: (गंभीर स्वर में)

वह युवा और जोशीले हैं, लेकिन उन्हें कूटनीति की गहराई नहीं समझ आती। जर्मनी को युद्ध से दूर रखना मेरी प्राथमिकता है।


अधिकारी 2:

लेकिन केसर को औपनिवेशिक विस्तार चाहिए।


बिस्मार्क:

विस्तार नहीं, स्थिरता जर्मनी की ज़रूरत है।



दृश्य 2: केसर विलियम II का राजमहल


(केसर विलियम II सिंहासन पर बैठे हैं। उनके मंत्री खड़े हैं।)


केसर विलियम II:

बिस्मार्क की नीतियां जर्मनी को कमजोर बना रही हैं। हमें एक साम्राज्य बनना है—ब्रिटेन और फ्रांस से भी बड़ा।


जर्मन मंत्री:

लेकिन चांसलर ने अब तक हर कूटनीतिक चाल में हमें सफल बनाया है।


केसर विलियम II: (गुस्से में)

उनकी सफलता अब अतीत की बात है। मैं जर्मनी का भविष्य हूं।


सेक्रेटरी: (प्रवेश करते हुए)

महाशय, बिस्मार्क चर्चा के लिए आ रहे हैं।


केसर विलियम II:

अच्छा। अब मैं तय करूंगा कि जर्मनी किस दिशा में जाएगा।


दृश्य 3: बिस्मार्क और केसर विलियम II की मुलाकात


(बिस्मार्क और विलियम II आमने-सामने खड़े हैं। माहौल तनावपूर्ण है।)


केसर विलियम II:

बिस्मार्क, आपकी "शांति नीति" अब पुरानी हो चुकी है। हमें अपने साम्राज्य का विस्तार करना है।


बिस्मार्क: (शांत स्वर में)

महाशय, जर्मनी को स्थिरता चाहिए, युद्ध नहीं। यदि हमने शक्तियों को उकसाया, तो पूरा यूरोप हमारे खिलाफ खड़ा हो जाएगा।


केसर विलियम II: (क्रोध में)

यूरोप हमारी ताकत को मानता है। मैं अपनी नीति बदलूंगा, और अगर आप सहमत नहीं हैं, तो शायद आपको पद छोड़ना होगा।


बिस्मार्क:

महाशय, यह साम्राज्य मेरी मेहनत का नतीजा है। मैं इसे बर्बाद नहीं होने दूंगा।


केसर विलियम II:

आपके तरीके पुराने हो चुके हैं। अब मैं जर्मनी को नई दिशा में ले जाऊंगा।


(दोनों के बीच बहस बढ़ती है। अंत में बिस्मार्क गहरी सांस लेते हुए खड़े होते हैं।)


बिस्मार्क:

ठीक है, महाशय। यदि यह आपका आदेश है, तो मैं पद छोड़ दूंगा।


दृश्य 4: बिस्मार्क का इस्तीफा


(बिस्मार्क अपने कार्यालय में अपने सहयोगियों के साथ बैठते हैं।)


अधिकारी 1:

यह अन्याय है। आपने जर्मनी को बनाया, और अब वे आपको छोड़ रहे हैं।


बिस्मार्क:

यह इतिहास का चक्र है। शक्ति हमेशा बदलती रहती है। लेकिन मेरी चेतावनी याद रखना—विलियम का यह जोश जर्मनी को संकट में डाल देगा।


दृश्य 5: संसद और जनता का दृश्य


(एक किसान और एक मजदूर बहस कर रहे हैं।)


किसान:

बिस्मार्क ने हमें स्थिरता दी। अब विलियम का युद्ध हमें बर्बाद कर देगा।


मजदूर:

लेकिन सम्राट को अपनी बात कहने का अधिकार है।


(पृष्ठभूमि में युद्ध की आवाजें सुनाई देने लगती हैं। मंच पर अंधेरा छा जाता है।)


अंतिम दृश्य: पतन और चेतावनी


(बैकग्राउंड से आवाज आती है—बिस्मार्क की चेतावनी और युद्ध का विनाश। मंच पर लिखा उभरता है—)


"1890 में बिस्मार्क का पतन केवल एक व्यक्ति का पतन नहीं था, बल्कि जर्मनी की स्थिरता का अंत था। उनकी चेतावनी को अनसुना कर दिया गया, और जर्मनी को प्रथम विश्व युद्ध की विनाशकारी राह पर धकेल दिया गया।"


(पर्दा गिरता है।)


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