गोवा का प्राचीन इतिहास उसकी समृद्ध सांस्कृतिक और राजनीतिक विरासत को दर्शाता है। यह क्षेत्र अनेक शक्तिशाली साम्राज्यों का हिस्सा रहा है, जिनमें मौर्य, सातवाहन, और चोल राजवंश प्रमुख हैं।
1. मौर्य साम्राज्य (322-185 ईसा पूर्व)
मौर्य साम्राज्य के शासनकाल में गोवा भारत के व्यापार और संस्कृति के केंद्र के रूप में उभरा। अशोक जैसे महान सम्राटों ने बौद्ध धर्म का प्रसार किया और गोवा में बौद्ध स्तूप और अन्य संरचनाओं का निर्माण करवाया। माना जाता है कि गोवा के कुछ प्राचीन समुद्री बंदरगाह मौर्य काल में व्यापारिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध थे।
2. सातवाहन साम्राज्य (1 शताब्दी ईसा पूर्व - 2 शताब्दी ईस्वी)
सातवाहन वंश के शासन के दौरान गोवा महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र बन गया। सातवाहनों ने इस क्षेत्र को समुद्री व्यापार और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए विकसित किया।
गोवा का प्राचीन नाम "गोमंतक" या "गोपराष्ट्र" सातवाहन साहित्य में मिलता है।
इस काल में गोवा के बंदरगाह पश्चिमी एशिया और रोमन साम्राज्य के साथ व्यापार के लिए प्रसिद्ध थे।
3. चोल साम्राज्य (10वीं-12वीं शताब्दी)
चोल राजवंश का प्रभाव मुख्यतः दक्षिण भारत में था, लेकिन उन्होंने गोवा के तटीय क्षेत्रों पर भी नियंत्रण स्थापित किया। चोलों के शासनकाल में:
गोवा में समुद्री व्यापार और शिपिंग का विकास हुआ।
गोवा का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व बढ़ा, विशेषकर हिंदू मंदिरों के निर्माण के कारण।
चोलों की समुद्री शक्ति ने गोवा को दक्षिण भारत और सुदूर पूर्वी देशों के बीच व्यापार का केंद्र बनाया।
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गोवा के प्राचीन नाम
गोवा का उल्लेख "गोमंतक", "गोपराष्ट्र" और "गोआपुरी" के नामों से भी किया जाता है। यह क्षेत्र पौराणिक कथा के अनुसार भगवान परशुराम द्वारा बसाया गया बताया जाता है।
गोवा का प्राचीन इतिहास इसे भारत के सांस्कृतिक, धार्मिक और व्यापारिक धरोहर का अनमोल हिस्सा बनाता है।
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