महाराष्ट्र भारत के सबसे जैव विविधता से समृद्ध राज्यों में से एक है। इसकी भौगोलिक स्थिति, जलवायु और विविध पारिस्थितिक तंत्र इसे विभिन्न प्रकार के जीव-जंतुओं और पौधों के लिए उपयुक्त आवास प्रदान करते हैं। राज्य में पश्चिमी घाट जैसे क्षेत्र हैं, जो विश्व धरोहर स्थलों में शामिल हैं और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध हैं।
महाराष्ट्र की जैव विविधता के प्रमुख पहलू
1. पारिस्थितिक क्षेत्र
पश्चिमी घाट: यह क्षेत्र दुनिया के 36 जैव विविधता हॉटस्पॉट्स में से एक है। यहां कई स्थानिक प्रजातियां पाई जाती हैं।
सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला: यह महाराष्ट्र के पारिस्थितिक संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
वन क्षेत्र: महाराष्ट्र में लगभग 20% भूभाग वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
सह्याद्रि के जंगल: ये घने जंगल विभिन्न प्रकार के जानवरों, पक्षियों और पौधों का घर हैं।
2. प्रमुख जीव-जंतु
पशु:
बंगाल टाइगर
भारतीय तेंदुआ
भारतीय गौर
नीलगाय
चीतल
पक्षी:
मालाबार ट्रोगन
ग्रेट हॉर्नबिल
भारतीय मोर
विभिन्न प्रकार के बगुले और जलपक्षी
सरीसृप:
कोबरा
गंगा घड़ियाल
वॉटर मॉनिटर लिज़ार्ड
3. पौधों की विविधता
महाराष्ट्र में औषधीय और स्थानिक पौधों की भरमार है।
महत्वपूर्ण वृक्ष: साल, सागौन, बांस, नीम, और अर्जुन।
औषधीय पौधे: अश्वगंधा, सतावरी, और तुलसी।
4. संरक्षित क्षेत्र और अभ्यारण्य
महाराष्ट्र में कई राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभ्यारण्य हैं:
ताडोबा अंधारी टाइगर रिज़र्व
नवेगांव राष्ट्रीय उद्यान
संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान
चिकालधरा अभ्यारण्य
भंडारा और चंद्रपुर के जंगल
5. आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व
महाराष्ट्र की जैव विविधता यहां के पारंपरिक चिकित्सा, कृषि और सांस्कृतिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
यहाँ के आदिवासी समुदाय जंगलों पर निर्भर हैं और जैव विविधता का संरक्षण उनकी परंपराओं का हिस्सा है।
6. खतरे और संरक्षण प्रयास
खतरे:
वनों की कटाई
शहरीकरण
प्रदूषण
जलवायु परिवर्तन
संरक्षण प्रयास:
संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार
जागरूकता अभियान
जैव विविधता बोर्ड की स्थापना
महाराष्ट्र की जैव विविधता न केवल पारिस्थितिक दृष्टि से बल्कि आर्थिक और सांस्कृ
तिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके संरक्षण के लिए सामुदायिक और सरकारी प्रयासों की आवश्यकता है।
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