महाराष्ट्र का भूगोल
पश्चिमी भारत में स्थित महाराष्ट्र, क्षेत्रफल के हिसाब से देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है और दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है। इसके विविध भूगोल में तटीय मैदान, पर्वत श्रृंखलाएँ, पठार और नदी घाटियाँ शामिल हैं।
मुख्य भौगोलिक विशेषताएँ:
1. स्थान:
अक्षांश: 15.60°N से 22.00°N
देशांतर: 72.60°E से 80.90°E
सीमाएँ:
उत्तर: गुजरात, मध्य प्रदेश
पूर्व: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़
दक्षिण: कर्नाटक, तेलंगाना, गोवा
पश्चिम: अरब सागर
2. क्षेत्र:
कोंकण तटीय मैदान: पश्चिमी घाट और अरब सागर के बीच भूमि की एक संकरी पट्टी, जैव विविधता से समृद्ध और अपने समुद्र तटों, मछली पकड़ने और बागवानी के लिए जानी जाती है।
पश्चिमी घाट (सह्याद्री पहाड़ियाँ): यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, घने जंगल, झरने और वन्यजीव अभयारण्यों का घर। यह क्षेत्र में मानसून को प्रभावित करता है।
दक्कन का पठार: राज्य के अधिकांश भाग को कवर करने वाला एक बड़ा ज्वालामुखीय पठार, जिसकी विशेषता काली बेसाल्ट मिट्टी (कपास और गन्ने की खेती के लिए आदर्श) है।
विदर्भ क्षेत्र: अपने जंगलों और खनिज संसाधनों, जिनमें कोयला और मैंगनीज शामिल हैं, के लिए जाना जाता है।
3. प्रमुख नदियाँ:
गोदावरी: दक्षिण गंगा (दक्षिण की गंगा) के रूप में जानी जाने वाली, यह पूर्व की ओर बंगाल की खाड़ी में बहती है।
कृष्णा: एक और महत्वपूर्ण नदी जो पूर्व की ओर बहती है।
अन्य नदियाँ: तापी (ताप्ती), भीमा, वर्धा और वैनगंगा।
4. जलवायु:
उष्णकटिबंधीय मानसून जलवायु: गर्म ग्रीष्मकाल (मार्च-मई), भारी बारिश (जून-सितंबर), और हल्की सर्दियाँ (नवंबर-फरवरी)।
वर्षा: काफी भिन्नता होती है; कोंकण में भारी वर्षा होती है, जबकि विदर्भ में अर्ध-शुष्क जलवायु होती है।
5. प्राकृतिक संसाधन:
कोयला, मैंगनीज और बॉक्साइट जैसे खनिजों से भरपूर।
वनों से लकड़ी, औषधीय पौधे और अन्य वन उत्पाद प्राप्त होते हैं।
6. वनस्पति और जीव:
पश्चिमी घाट में जैव विविधता के हॉटस्पॉट।
अभयारण्य: ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व, मेलघाट टाइगर रिजर्व और संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान।
महत्व:
महाराष्ट्र का विविध भूगोल इसकी कृषि, औद्योगिक और सांस्कृतिक समृद्धि में योगदान देता है। इसकी तटरेखाएँ व्यापार और मछली पकड़ने का समर्थन करती हैं, जबकि पठारी क्षेत्र कृषि और खनन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
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